Prem

एक बार संत राबिया एक धार्मिक पुस्तक पढ़ रही थीं। पुस्तक में एक जगह लिखा था,
“शैतान से घृणा करो, प्रेम से नहीं।” राबिया ने वह लाइन काट दी।
कुछ दिन बाद उनसे मिलने एक संत आए। वह उस पुस्तक को पढ़ने लगे। उन्होंने कटा हुआ वाक्य देख कर सोचा कि किसी नासमझ ने उसे काटा होगा। उसे धर्म का ज्ञान नहीं होगा।
उन्होंने राबिया को वह पंक्ति दिखा कर कहा- “जिसने यह पंक्ति काटी है वह जरूर नास्तिक होगा।” Continue reading

Lord Shiva Visit Gokul to see Baby Krishna

It is said that whenever lord Vishnu has taken avtar lord Shiva use to keep a track of his welfare because of his love towards lord Vishnu.

Just as the Ganges is the best river among all rivers, similarly among all gods Lord Vishnu is the best. Just as Lord Siva is the best devotee among all the Lord’s devotees.

When Lord Vishnu took incarnation as Krishna, Lord Shiva goes to Gokul for a glimpse of Child –Krishna ( just like he went to Ayodhya when Ramji took incarnation ) .
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Goswami Tulsidas

गोस्वामी तुलसीदास

गोस्वामी तुलसीदास [1497 – 1623] एक महान कवि थे। उनका जन्म राजापुर गाँव (वर्तमान बाँदा जिला) उत्तर प्रदेश में हुआ था।  संवत् 1554 के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं भाग्यवान दम्पति के यहाँ इस महान आत्मा ने मनुष्य योनि में जन्म लिया। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु पूरे बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे। जन्म लेने के बाद प्राय: सभी शिशु रोया ही करते हैं किन्तु इस बालक ने जो पहला शब्द बोला वह राम था। अतएव उनका घर का नाम ही रामबोला पड गया। माँ तो जन्म देने के बाद दूसरे ही दिन चल बसी बाप ने किसी और अनिष्ट से बचने के लिये बालक को चुनियाँ नाम की एक दासी को सौंप दिया और स्वयं विरक्त हो गये। जब रामबोला साढे पाँच वर्ष का हुआ तो चुनियाँ भी नहीं रही। वह गली-गली भटकता हुआ अनाथों की तरह जीवन जीने को विवश हो गया।

भगवान शंकरजी की प्रेरणा से रामशैल पर रहनेवाले श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी (नरहरि बाबा) ने इस रामबोला के नाम से बहुचर्चित हो चुके इस बालक को ढूँढ निकाला और विधिवत उसका नाम तुलसीराम रखा। तदुपरान्त वे उसे अयोध्या ( उत्तर प्रदेश) ले गये और वहाँ संवत्‌ 1561 माघ शुक्ला पञ्चमी (शुक्रवार) को उसका यज्ञोपवीत-संस्कार सम्पन्न कराया। बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। वह एक ही बार में गुरु-मुख से जो सुन लेता, उसे वह कंठस्थ हो जाता।
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Tulsi Mahima – Hindi Story

तुलसी माला की महिमा

 

राजस्थान में जयपुर के पास एक इलाका है – लदाणा। पहले वह एक छोटी सी रियासत थी। उसका राजा एक बार शाम के समय बैठा हुआ था। उसका एक मुसलमान नौकर किसी काम से वहाँ आया। राजा की दृष्टि अचानक उसके गले में पड़ी तुलसी की माला पर गयी। राजा ने चकित होकर पूछाः

“क्या बात है, क्या तू हिन्दू बन गया है ?”

“नहीं, हिन्दू नहीं बना हूँ।”

“तो फिर तुलसी की माला क्यों डाल रखी है ?”

“राजासाहब ! तुलसी की माला की बड़ी महिमा है।”

“क्या महिमा है ?”

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Feeling of Revenge : Hindi Story

प्राचीन काल की बात है, रुरु नामक एक मुनि-पुत्र था| एक बार वह घूमता हुआ स्थूलकेशा ऋषि के आश्रम में पहुंचा| वहां एक सुंदर युवती को देख वह उस पर आसक्त हो गया|
रुरु को उस अद्भुत सुंदर युवती के विषय में ज्ञात हुआ कि वह किसी विद्याधर की मेनका अप्सरा से उत्पन्न पुत्री थी| अप्सराओं की संतान का पालन-पोषण भी कोयलों के समान अन्य माता-पिताओं द्वारा होता है| इसी प्रकार प्रमद्वरा नाम की मेनका की उस पुत्री का पालन-पोषण भी स्थूलकेशा ऋषि ने किया था| उन्होंने ही उसका नाम भी प्रमद्वरा रखा था|
प्रमद्वरा पर आसक्त रुरु स्वयं को न रोक सका और स्थूलकेशा ऋषि के पास जाकर उस कन्या की मांग कर दी| पर्याप्त सोचने और विचारने के बाद ऋषि इसके लिए सहमत हो गए| दोनों का विवाह होना निश्चित हो गया, किंतु विवाह की तिथि समीप आने पर प्रमद्वरा को एक सर्प ने डस लिया|

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Windows XP keyboard shortcuts

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Swadeshi Apnao – List of Indian Companies

Swadeshi Apnao

 

The Swadeshi movement started with the partition of Bengal by the Viceroy of India, Lord Curzon, 1905 and continued up to 1911. It was the most successful of the pre-Gandhian movements. Its chief architects were Aurobindo Ghosh, Lokmanya Bal Gangadhar Tilak, Bipin Chandra Pal and Lala Lajpat Rai. Swadeshi, as a strategy, was a key focus of Mahatma Gandhi, who described it as the soul of Swaraj (self rule). Gandhi, at the time of the actual movement, remained loyal to the British Crown.

Today though the East India Company no longer exists in India, there are several foreign companies which are carrying on trade in India. After the liberalization and globalization policies of India, various foreign companies came to India to make money and in the process destroyed the domestic industries and suppliers to monopolize the market. Now these companies are making crores of rupees and sending the money back to their parent concerns or their home countries in forms of royalties or profits.

Thus the time has arrived to restart the Swadeshi and Boycott movements to protect India from these companies which are trying to weaken India’s economy.

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