Story of Surya Putra Shanidev

Shani is one of the Navagrahas which are the nine primary celestial beings in Hindu astrology. Shani is a Dev and son of Surya Dev (the Hindu Sun God) and his wife Chhaya (Shadow goddess) and hence also known as Chayyaputra. He is the cousin of Yama, the Hindu God of death. It is said that when he opened his eyes as a baby for the very first time, the sun went into an eclipse, which clearly denotes the impact of Shani on astrological charts. Shani is described as having a dark complexion, a beautiful face, his caste is teli (Oil vendors), he is clothed in black; holding a sword, arrows, two daggers , mounted on a Black vulture or a raven and he prays to Kal-bhairav (God of time). Shani is said to be older in age and that is why he is looked upon as an old man. Shani is a shadow planet or “Chhaya- Graha”- that part of a person which is normally not seen.

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PM Modi unveils 112 ft Adiyogi Shiva statue

In the yogic culture, Shiva is not known as a god, but as the Adiyogi or the first yogi – the originator of yoga. He was the one who first put this seed into the human mind. According to the yogic lore, over fifteen thousand years ago, Shiva attained to his full enlightenment and abandoned himself in an intense ecstatic dance upon the Himalayas. When his ecstasy allowed him some movement, he danced wildly. When it became beyond movement, he became utterly still.    — Sadhguru

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किसी का जी न दुखाया करो

भाई! मनुष्यता के नाते तो किसी का मन न दुःखित किया करो। सम्भव है उसमें कुछ कमियाँ हों, कुछ बुराइयाँ भी हों। यह भी हो सकता है कि उसके विचार तुम से न मिलते हों, या तुम्हारी राय में उसके सिद्धान्त ठीक न हों। पर क्या इसीलिए तुम उसके मन पर अपने वाक्-प्रहारों द्वारा आघात पहुँचाओगे? तुम यह न भूल जाओ कि वह मनुष्य है, उसके भी मन होता है, तुम्हारे कठोर वचन सुनकर उसके भी हृदय में ठेस पहुँचती है और उसको भी अपने आत्माभिमान का अपनी सत्यता का अपनी मनुष्यता के अधिकार का कुछ मान है।

सम्भव है तुम्हारा वाक् चातुर्य इतना अच्छा हो कि तुम उसे अपनी युक्तियों द्वारा हरा दो। सम्भव है वह व्यर्थ विवाद करना ठीक न समझे और तुम अपनी टेक द्वारा उसे झुका दो। यह भी सम्भव है कि उसका ज्ञान अपूर्ण हो और वह बार बार तुमसे हार खाता रहे। पर इन अपने विवादों में ऐसे साधनों का प्रयोग तो न करो जो उसके हृदय पर मार्मिक चोट करते हों। संसार में सुन्दर युक्तियाँ क्या कम हैं? क्या ऐसी बातों का पूर्णतः अभाव ही हो गया है जो उसे परास्त भी कर दे, पर उस पर चोट न करें? क्या ऐसे तर्क संसार से चल बसे हैं जिनसे तुम अपना पक्ष भी स्थापित कर लो और उसका भी जी न दुःखे?

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Lord Krishna – Damodar Leela

Lord Krishna willingly gets tied by mother Yashoda.

Damodar means “One who has rope around his belly’. Dam – Rope, Udar – Stomach/Belly

One day, when Mother Yashoda saw that all of the maidservants were already engaged, she personally began to churn the yogurt, and while doing so, she composed songs about Krishna’s childhood pastimes and enjoyed singing them to herself. Dressed in a saffron-yellow sari, with a belt tied around her full hips, Mother Yashoda worked hard, so that as her whole body shook, and her bangles and earrings tinkled. Because of intense love for her child, her breasts were wet with milk. Her beautiful face was wet with perspiration, and malati flowers fell from her hair.

Vaishnava-toshani of Sanaatana Goswami states that this took place on the Dipavali day. Among all of Nanda Maharaja’s cows, Yashoda kept several that ate only special grass that would flavour the milk to make it very tasty. Mother Yashoda personally churned the yogurt from this milk into butter, for she thought that Krishna was stealing butter from others’ houses because He did not like that which was ordinarily prepared.
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Shri Krishna Janm Katha

श्रीकृष्ण जन्म की कथा

 

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस माना जाता है। इसी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

 

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म संबंधी कथा भी सुनते-सुनाते हैं, जो इस प्रकार है-

 

‘द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था।

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Lord Shiva Visit Gokul to see Baby Krishna

It is said that whenever lord Vishnu has taken avtar lord Shiva use to keep a track of his welfare because of his love towards lord Vishnu.

Just as the Ganges is the best river among all rivers, similarly among all gods Lord Vishnu is the best. Just as Lord Siva is the best devotee among all the Lord’s devotees.

When Lord Vishnu took incarnation as Krishna, Lord Shiva goes to Gokul for a glimpse of Child –Krishna ( just like he went to Ayodhya when Ramji took incarnation ) .
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Goswami Tulsidas

गोस्वामी तुलसीदास

गोस्वामी तुलसीदास [1497 – 1623] एक महान कवि थे। उनका जन्म राजापुर गाँव (वर्तमान बाँदा जिला) उत्तर प्रदेश में हुआ था।  संवत् 1554 के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं भाग्यवान दम्पति के यहाँ इस महान आत्मा ने मनुष्य योनि में जन्म लिया। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु पूरे बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे। जन्म लेने के बाद प्राय: सभी शिशु रोया ही करते हैं किन्तु इस बालक ने जो पहला शब्द बोला वह राम था। अतएव उनका घर का नाम ही रामबोला पड गया। माँ तो जन्म देने के बाद दूसरे ही दिन चल बसी बाप ने किसी और अनिष्ट से बचने के लिये बालक को चुनियाँ नाम की एक दासी को सौंप दिया और स्वयं विरक्त हो गये। जब रामबोला साढे पाँच वर्ष का हुआ तो चुनियाँ भी नहीं रही। वह गली-गली भटकता हुआ अनाथों की तरह जीवन जीने को विवश हो गया।

भगवान शंकरजी की प्रेरणा से रामशैल पर रहनेवाले श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी (नरहरि बाबा) ने इस रामबोला के नाम से बहुचर्चित हो चुके इस बालक को ढूँढ निकाला और विधिवत उसका नाम तुलसीराम रखा। तदुपरान्त वे उसे अयोध्या ( उत्तर प्रदेश) ले गये और वहाँ संवत्‌ 1561 माघ शुक्ला पञ्चमी (शुक्रवार) को उसका यज्ञोपवीत-संस्कार सम्पन्न कराया। बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। वह एक ही बार में गुरु-मुख से जो सुन लेता, उसे वह कंठस्थ हो जाता।
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