Guru Diksha

Guru Diksha: A Hindi Story

 

एक शहर में तीन सखियाँ रहती थीं । बचपन से एक साथ खेलती कूदती और पढ़ती लिखती बड़ी हुई। तीनो का आपस में बहुत प्रेम था ।उन तीनो में एक ही समानता थी कि तीनो को प्रभु प्रेम और प्रभु प्राप्ति की लगन थी ।उन्होंने सुन रखा था कि गुरु के बिना प्रभु की प्राप्ति कठिन है ।

उन्ही के शहर में एक गुरुदेव की कुटिया थी ।पर वहां यह समस्या थी कि वे किसी नारी को शिष्या नहीं बनाते थे ।उन्हें किसी अन्य गुरु की जानकारी ही न थी ।इस लिए उन तीनो ने दृढ़ संकल्प किया कि यहीं चलते हैं और उन्ही की कुटिया के बाहर जाकर बैठते हैं ।

वे तीनो वहां पहुँच गयी , वहीँ खड़े एक सेवादार से उन्हों ने अपनी इच्छा जाहिर की ।
सेवादार ने बताया कि गुरुदेव किसी नारी को दीक्षा नही देते इस लिए आपको वापिस चले जाना चाहिये ।
तीनो सखियाँ तो सोच कर आई थीं कि बिना दीक्षा वापिस नहीं जाना ।
उन तीनो ने सेवादार से कहा कि , ” हम तो यहीं बैठी हैं , अगर गुरुदेव कबूल न करेंगे तो कोई बात नहीं , हम यहीं भूख और प्यास सहती हुई अपने प्राण त्याग देंगी । ” ।और वे तीनो वहीँ बैठ गयी ।

अन्दर गुरुदेव तक खबर पहुंचा दी गयी ।पर गुरुदेव ने साफ़ इनकार कर दिया ।एक दिन बीता , दो दिन बीते पर उन तीनो पर भूख और प्यास से मृत्यु का कोई डर का लक्ष्ण नही उभरा ।हर तरफ चिंता की लहरें दौड़ने लगी गरुदेव भी परेशान से दिखने लगे ।

गुरुदेव ने एक सेवादार को भेजा ।सेवादार ने आकर सूचना दी , ” गुरुदेव ने आपको एक एक कर अंदर बुलाया है । “
उन्ही में से एक सखी को अंदर ले जाया गया ।
गुरुदेव ने धरना देने का कारण पुछा , पहली सखी का जवाब था , ” हमे प्रभु के घर में कबूल होना है । जो कि गुरु के बिना असंभव है ।”
गुरुदेव – एक समस्या है , अगर आप उस समस्या का समाधान कर देंगी तो आपको गुरु दीक्षा मिल जाएगी , अन्यथा आपको अगले जन्म तक इँतजार करना पड़ेगा ।

पहले वाली ने समस्या पूछी ।
गुरुदेव ने समस्या बताई , मान लो कि आप एक समुद्री जहाज़ में हो उस में आप अकेली हो और बाकी सभी पुरुष हैं ।अगर वहां सबकी नियत ख़राब हो जाये तो अपना बचाव कैसे करोगी ?
वह महिला एक वेश्या थी , उसका जवाब था कि कोई समस्या नही होगी समाधान तो तभी निकालना होगा अगर समस्या हो तो ।
गुरुदेव ने उसे एक तरफ बैठने का इशारा किया और वह बैठ गयी ।

अब दूसरी को अन्दर बुलाया गया , उसे समस्या बताई गयी ,वह कुछ ज्यादा ही धार्मिक विचारों वाली थी ।उसने जवाब दिया , ” किसी के हाथ आने से पहले ही समुद्र में कूद आत्म हत्या कर लूंगी । “
गुरुदेव ने उसे भी एक तरफ बैठने का इशारा कर दिया ।

अब तीसरी को अंदर बुलाया गया और वही समस्या उसे भी बताई गयी ।अब तीसरी ने दोनों हाथ जोड़े आँखों में आंसू भर जवाब दिया , ” गुरुदेव मेरे पास कोई समाधान नही है । मुझे तो आप जैसा कहेंगे , मैं वैसे ही कर लूंगी ” ।
इस जवाब से संतुष्ट होकर गुरुदेव ने उसे कबूल कर दीक्षा प्रदान कर दी.

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